बिहार पुलिस की कार्यशैली का जनोन्मुखीकरण People-Oriented Transformation of the Working Style of Bihar Police
- Jan 6
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Updated: 4 days ago
Research Paper | 2026 | Volume 1 | Issue 02 | Page 01-09
संवाद लेखक:-
नरेंद्र कुमार, PhD शोधार्थी,
लोक प्रशासन, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा।
ईमेल - narendraacp86@gmail.com
सार (Abstract)
पुलिस केवल दंडात्मक शक्ति का साधन नहीं है; यह नागरिक सुरक्षा, विधि-शासन, अधिकार-संरक्षण और सार्वजनिक विश्वास का मूल संस्थान भी है। विशेष रूप से, राज्य में पुलिस की कार्यशैली का जनोन्मुखीकरण जनसंख्या-घनत्व, ग्रामीण निर्भरता, सामाजिक विविधता और स्थानीय विवादों से संबंधित है। जनोन्मुखी पुलिसिंग का अर्थ है ऐसी पुलिस व्यवस्था जो नागरिकों को भय नहीं देती और उनका भरोसा बनाए रखती है; शिकायत को बोझ नहीं मानें, बल्कि अधिकार मानें; और हिंसा से कानून बनाने की जगह सेवा-उन्मुख व्यवहार, बहस, संवेदनशीलता और पारदर्शिता का प्रयोग करे। इस शोध-पत्र में बिहार पुलिस की वर्तमान कार्यशैली, पुलिस सुधार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामुदायिक पुलिसिंग, डिजिटल पुलिसिंग, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा, शिकायत-निवारण, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और जवाबदेही प्रणाली का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन विश्लेषणात्मक शोध है और द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है: बिहार पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट, आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली, महिला हेल्पलाइन, एनसीआरबी, बीपीआरएंडडी, गृह मंत्रालय, सर्वोच्च न्यायालय के पुलिस सुधार निर्देशों और विश्वसनीय समाचार स्रोतों। नतीजतन, बिहार पुलिस की कार्यक्षमता को केवल अपराध नियंत्रण के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता; पुलिसकर्मी के व्यवहार, थाने की सुविधा, प्राथमिकी दर्ज करने की निष्पक्षता, जांच की पारदर्शिता और आम लोगों का अनुभव भी उसे सराहना करना चाहिए।जनोन्मुखीकरण के लिए प्रशिक्षण, नैतिक नेतृत्व, विधिक सुधार, स्वतंत्र शिकायत प्राधिकरण, सामाजिक निगरानी और तकनीक का एकीकरण आवश्यक है।
मुख्य शब्द (Keywords): बिहार पुलिस; जनोन्मुखीकरण; पुलिस सुधार; सामुदायिक पुलिसिंग; नागरिक अधिकार; पुलिस जवाबदेही; सुशासन; कानून-व्यवस्था; सेवा-उन्मुख पुलिसिंग।
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