Reform in bureaucracy : Basis of Good governance. नौकरशाही-सुधार : सुशासन का आधार
Updated: Jul 5
Research Paper | 2026 | January | Volume 1 | Issue 1 | Page 10-21
नरेंद्र कुमार, PhD शोधार्थी, लोक प्रशासन, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा।
प्रो. डॉ. उमेश कुमार, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा।
विभागाध्यक्ष (HOD) - प्रो. डॉ. रमेश सिंह, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा।
संवाद लेखक:-
नरेंद्र कुमार, PhD शोधार्थी,
लोक प्रशासन, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा।
ईमेल - narendraacp86@gmail.co
सार (Abstract)
“नौकरशाही सुधार: “सुशासन का आधार” विषय भारतीय लोक प्रशासन की बदलती मांगों के बारे में चर्चा करता है। अध्ययन का मुख्य तर्क यह है कि सुशासन केवल कानूनों, तकनीकी उपकरणों या नीतिगत घोषणाओं से नहीं आता, बल्कि विधि-सम्मत, पारदर्शी, उत्तरदायी, नागरिक-केंद्रित और नैतिक रूप से सजग नौकरशाही से आता है। स्वतंत्रता के बाद भारतीय नौकरशाही ने अधिकार-आधारित शासन, कल्याणकारी राज्य और विकास-प्रशासन में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन आज भी वह प्रभावी नहीं है क्योंकि लालफीताशाही, राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार, स्थानांतरण-संस्कृति और कम जवाबदेही हैं। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग, सूचना का अधिकार अधिनियम, डिजिटल इंडिया, सीपीग्राम्स, मिशन कर्मयोगी और लोक सेवा गारंटी कानूनों ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम उठाया है, लेकिन इनके प्रभाव राज्यों और विभागों में अलग-अलग नहीं हैं (DARPG, n.d.)। DoPT (2021); भारत सरकार, 2020; (विश्व बैंक, 2024) बिहार के संदर्भ में, RTPS अधिनियम, लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, प्रशासनिक सुधार मिशन, ई-सेवाएँ और HRMS नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, लेकिन समन्वय, क्षमता, डिजिटल विभाजन और स्थानीय स्तर की जवाबदेही जैसे चुनौतियों का सामना करना बाकी है।
मुख्य शब्द (Keywords):- नौकरशाही-सुधार; सुशासन; पारदर्शिता; उत्तरदायित्व; ई-गवर्नेंस; लोक सेवा गारंटी अधिनियम; नागरिक-केंद्रित शासन।
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